Dimag Kaise Tej Kare ?

प्रिय पाठकों, आज की इस पोस्ट में आप सीखेंगे की हम अपना दिमाग कैसे बढ़ा सकते हैं या फिर कुछ लोगों के मन में अक्सर यह प्रश्न उठता रहता है कि हम बुद्धिमान कैसे बन सकते हैं या बहुत लोगों की यह भी समस्या अधिकांश पाई जाती है कि अपनी याददाश्त अर्थात याद रखने की शक्ति कैसे बढ़ाएं तो इन सभी समस्याओं का निवारण इस पोस्ट को पढ़ने के बाद हो जाएगा।

 यह पोस्ट आप बहुत फुरसत व आराम से समझ-समझ कर पढ़िए और यह वादा मैं आपसे जरूर करूंगा कि आप आज जिस उद्देश्य के लिए यह पोस्ट पढ़ रहे हैं आप निराश नहीं होंगे ।

Dimag tej kaise kare

बुद्धि ही बुद्धि का निर्माण करती है।

हमारी सोच भी कितनी अजीब है कभी हम सोचते हैं कि हम अपने दिमाग को बढ़ा ले और कभी हम सोचते हैं कि हम बुद्धिमान या जीनियस कैसे बने? लेकिन कुछ ही क्षण पश्चात हम यह भी सोचते हैं कि हम अपनी याददाश्त कैसे बढ़ाए? ऐसे ही ढेरों सवाल हमारे चंचल मन में उठते रहते हैं और यह कोई अपराध नहीं है हमारी सोच मात्र है क्योंकि कुछ पाने की लालसा मानव के अंदर होना स्वाभाविक है।

वास्तव में उपर्युक्त सभी सवाल का संबंध एक ही सवाल से है तो चलिए सबसे पहले हम समस्या का संश्लेषण करते है।

मान कर चलिए आपको बुद्धिमान बनना है, तो ठीक है। लेकिन यह बात आपको भली-भांति जान लेनी चाहिए कि बुद्धिमान व्यक्ति तभी बुद्धिमत्ता को प्राप्त करता है जब वह अपनी याददाश्त तेज रख सकता हो। अन्यथा वह बुद्धिमान कभी नहीं बन पाएगा। चलिए मैं आपको एक उदाहरण देता हूं।

यह उदाहरण को मन ही मन कल्पना कीजिये तो बेहतर समझ आएगा। मान कर चलिए आपके सामने 10 सूत्र उपस्थित किए जाएं और उन्हें याद करने के लिए आपसे कहा जाए की यदि आप इन दसों सूत्रों को याद कर लेते हैं तो आप निश्चिंत बुद्धिमानओं की श्रेणी में आ जाएगे। लेकिन जब एक बालक उनको याद करने का प्रयास करता है तो वह जैसे जैसे उन्हें याद करता जाता है पीछे से वैसे-वैसे भूलता भी चला जाता है वह 3 से अधिक सूत्र कभी याद ही नहीं कर पाता इसका आशय यह है कि वह स्मरण शक्ति को कायम रखने में अक्षम है।

 मेरे कहने का आशय तो आप समझ ही गए होंगे कि कोई भी सवाल का महत्व इतना नहीं, जितना की यह है की है अपनी याददाश्त को कैसे तेज करें और जब हमारी याददाश्त तेज हो जाएगी तो हमारा दिमाग भी तेज हो जाएगा।

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घुमा फिर कर ये तथ्य इसी बात की और संकेत कर रहे है की हमें अपनी यादास्त बढ़ने के नियमो को जान लेना अब आवश्यक हो गया है तो चलिए कुछ खास नियमो का अवलोकन भी कर लेते है ।

 🧠 दिमाग तेज करने के लिए 10 महत्वपूर्ण बाते 🧐

 स्मृति शक्ति के विकास करने के लिए 10 महत्वपूर्ण उपाय निम्न बताएं गए हैं:-

1.  ज्ञान का  निरंतर उपयोग:  यदि हमारे दिमाग में कोई सूचना पहुंचती है तो वह एक निश्चित समय तक ही हमें याद रहेगी। इसलिए उचित समय पर उस ज्ञान का प्रयोग हमें दैनिक जीवन में या फिर उसका  प्रत्यवाहन करते रहना चाहिए।

2.  स्मृति की क्रमबद्धता:   स्मृति  वैसे तो लोहे से भी अधिक शक्तिशाली है लेकिन इसमें लोहे की तरह ही जंग भी लग जाता है और यह लोहे से जल्दी बेकार भी हो जाती है अर्थात ज्ञान को क्रमबद्ध तरीके से ग्रहण करना चाहिए ताकि स्मृति अधिक लंबे समय तक बानी रह सकें तो चलिए स्मृति की तीन क्रमबद्ध अवस्थाओं पर प्रकाश डालते हैं।

 किसी भी सूचना पूर्णतः याद रखने के लिए निम्नलिखित तीन अवस्थाएं उपयुक्त है:-

  •  संकेतन: यह स्मृति की पहली अवस्था है इस अवस्था में सूचना को मन मस्तिष्क तक केवल लाया जाता है।
  • सूचना भंडारण: यह स्मृति की दूसरी अवस्था है इस अवस्था में हमारी सूचना हमारे मस्तिष्क में धारण की जाती है अर्थात संचित की जाती है ।
  • स्मृति का पुनरुद्धार: यह स्मृति की तीसरी अवस्था है और इस अवस्था में हम ग्रहण की गई सूचना को याद रखने के लिए विभिन्न संज्ञानात्मक कार्यों में लगाते हैं और यह करने से सूचना का पुनर्बलन हो जाता है और सुचना लम्बे समय तक हमारे मस्तिष्क में सक्रीय रहती है। यह अवस्था ज्ञान की रक्षा की दृस्टि से महत्वपूर्ण भी है ।

नोट: इसमें कोई दो राय नहीं कि हमारा मस्तिष्क बिल्कुल कंप्यूटर में प्रयुक्त किए जाने वाले सीपीयू (कम्प्यूटर का मस्तिष्क ) की भांति होता है जैसे कि कंप्यूटर में पहले हम सूचना को इनपुट करते हैं उसके बाद उसका भंडारण होता है और भंडारण के तत्पश्चात उस सूचना को प्रोसेस किया जाता है और प्रासेस के तत्पश्चात उसका आउटपुट किया जाता है ठीक उसी प्रकार हमारे मस्तिष्क में भी सर्व प्रथम सूचना पहुंचती है और उसके बाद हम सूचना का विश्लेषण-संश्लेषण करते हैं और इसके बाद हम कोई उचित तथ्य पर पहुंच जाते हैं।

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3.  स्मृति विकास में संवेदनाओ का प्रयोग:  हमें जब कोई सूचना प्राप्त होती है तो वह सर्वप्रथम हमारे संवेदी अंगों से होकर हमारे मस्तिष्क तक पहुंचती है जैसे कि किसी वस्तु को चित्रात्मक रूप में देखकर या ध्वन्यात्मक रूप से सुनकर या फिर महसूस करके हम सूचना को ग्रहण करते हैं

संवेदी अंगो में हमारे आँख, नाक, कान, मुँह तथा त्वचा इत्यादि आते है ।

संवेदी अंगों के माध्यम से ग्रहण की गई सूचना को हम बहुत ही बृहद रूप से मस्तिष्क में स्टोर कर सकते हैं लेकिन यह मात्र हमें 1 सेकंड तक ही याद रह पाती है।

जैसे कि आपने 10 किलोमीटर की यात्रा तय की और उस बीच आपने अनगिनत चीजों को देखा, सुना और महसूस किया लेकिन बाद में आपसे उन सब चीजों के बारे में पूछा जाए तो आप उनका क्रमबद्ध वर्णन नहीं कर सकते।

आप यह समझते हैं कि आप देखी गई चीजों को, सुनी गई ध्वनियों को और महसूस की गई बातों को वर्णन कर सकते हैं तो आप अगले चरण पर चलिए और आप समझ जाएंगे कि मेरे कहने का आशय क्या है।

4.  अल्पकालिक रूप से स्मृति का भंडारण:  अल्पकालिक स्मृति का अर्थ है कि जिन सूचनाओ को हम बहुत ही कम समय के लिए याद रख पाते हैं उदाहरण के तौर पर आपने गजनी फिल्म में आमिर खान को तो देखा ही होगा वह अपनी देखी, सुनी और समझी गई बातों को बहुत ही कम समय तक याद रख पाता है इस िस्थति को शार्ट टर्म मेमोरी लोस्स कहते है ।

संवेदी स्मृति के प्रयोग से जिन बातों को हमने देखा, सुना और महसूस किया था उनमें जिन पहलुओं पर हमने ध्यान दिया वह पहलू आ जाते हैं अल्पकालिक स्मृति की श्रेणी में,  अल्पकालीन स्मृति की श्रेणी में सूचनाओं को स्टोर करने की क्षमता संवेदी स्मृति की अपेक्षा कम होती है इन सूचनाओं को हम मात्र 30 सेकंड तक ही याद रख पाते हैं

नोट: यहाँ पर याददास्त बढ़ने की एक ट्रिक हमें मिल गयी की अगर हमें किसी प्रकरण को स्थायी रूप से याद रखना है तो हमें उस सुचना को आधे मिनट से अधिक समय के लिए मस्तिष्क में रखनी पड़ेगी।

5. दीर्घकालिक स्मृति का प्रयोग:  एक बुद्धिमान व्यक्ति में यह स्मृति बहुत ही विकसित अवस्था में पाई जाती है अर्थात वह किसी भी सूचना को लंबे समय तक याद रखने में सक्षम होते हैं इस अवस्था तक पहुंचने के लिए उपर्युक्त दोनों अवस्थाओं (संवेदी स्मृति और अल्पकालिक स्मृति) से आप को गुजरना होगा और अल्पकालिक स्मृति में जिन पहलु पर हमने विस्तार पूर्वक अभ्यास किया तो वह पहलू दीर्घकालिक स्मृति में स्थानांतरित हो गये।

दीर्घकालिक स्थिति में सूचनाओं को संचय करने की क्षमता असीमित होती है और इसे हम जीवन पर्यंत तक याद रख सकते हैं और यह पूर्ण रूप से स्थाई भंडार होता है।

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6. संयोजन:  सीधे शब्दों में कहा जाए तो किसी सूचना को लंबे समय तक याद रखने के लिए अर्थात अपनी याददाश्त को बढ़ाने के लिए हमें तीन अवस्थाओं से होकर गुजरना पड़ेगा जिनका नाम क्रमशः संवेदी स्मृति, अल्पकालिक स्मृति तथा दीर्घकालिक स्मृति है और इनका वर्णन उपयुक्त किया गया है और इन तीनो के संयोजन करने से ही उद्देस्य की प्राप्ति होगी।

7. पूर्ण ज्ञान का होना: किसी भी तथ्य या सूचना को याद रखने के लिए उसके बारे में वितरित ज्ञान होना आवश्यक है अर्थात अगर मैं आपको किसी व्यक्ति का जन्मदिन याद रखने के लिए कहूं तो आप उसे बहुत जल्दी ही भूल जाएंगे लेकिन अगर आप उस व्यक्ति के जीवन सार, विशेषताएं, गुण तथा अवगुण आदि से परिचित होंगे तो आप उसके बारे में कोई भी सूचना आसानी से याद कर लेंगे।

8. पूर्व ज्ञान को ध्यान में रखना: किसी भी तत्व को याद रखने के लिए उस सूचना को पूर्व ज्ञान से जोड़ना आवश्यक है अर्थात अगर आप कोई बात किसी व्यक्ति को समझा रहे हैं तू उसके आचरण, परिवेश आदि को ध्यान में रखकर ही उसे सूचना प्रदान करें ताकि बात की गूढ़ता को वह शीघ्र ही समझ जाये।

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9. विचार विमर्श विधि: अगर आपको कुछ याद रखना है तो आप उसके बारे में तर्क वितर्क विचार-विमर्श आदि करने में झिझक ना करें आप जितना ज्यादा हो सके अपने मित्रों सहपाठियों और संबंधियों से उसके बारे में जानकारियां एकत्र करें और अपने विचार प्रस्तुत करें।

10. नींद: मित्रो यह बात पूर्णतया सत्य है की नींद का भी अध्यन या स्मृति की दृस्टि से बहुत महत्वपूर्ण है किसी भी व्यक्ति, मशीन या चीज को लगातार कोई काम नहीं करना चाहिए ।

कार्य के बीच में थोड़ा विराम लेने से हम पुनः ऊर्जावान जो जाते है हमें सही मार्गदर्शन भी होता है ।

यदि चीजों को याद करने के दौरान मानसिक थकाम का अनुभव हो तो नींद की छोटी सी झपकी ले लेने से दिमाग पुनः अध्यन के लिए तैयार हो जाता है ।

नोट: याद रहे नींद अधिक लम्बी होने पर आलस्य आ सकता है जो ज्ञान का दुश्मन है ।

🤔 क्या भूलना हमारी कमी है? 😕

दोस्तों हम सभी अपनी स्मृति को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न प्रयास करते रहते हैं ऐसे में कुछ लोग भूलने को एक बीमारी की तरह समझते हैं और भूलने वाले व्यक्तियों का अनादर भी करते हैं लेकिन आपका यह जानकर आश्चर्य होगा कि भूलना एक अवगुण नहीं बल्कि हमारे लिए अत्यंत आवश्यक गुण है बस यह एक सीमा में होना चाहिए।

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हमें अपनी स्मृति में महत्वपूर्ण तथ्यों आदि को ही याद रखना चाहिए ना कि हर एक अच्छी और बुरी बात को अगर हम सही व गलत हर बात को याद रखने लगेंगे तो हमारा मस्तिष्क एक कचरे के डब्बे के समान हो जाएगा और मस्तिष्क सही गलत की पहचान करना भूल जाएगा।

चलिए मैं आपको एक उदाहरण देता हूं मान कर चलिए एक व्यक्ति है जिसका एक सगा संबंधी परलोक सिधार जाता है और वह उसके गम में दुखी हो जाता है और सुध-बुध खो बैठता है उस समय तो ऐसा ही लगता है कि वह इन परिस्थितियों से कभी निकल ही नहीं पाएगा लेकिन कुछ समय पश्चात वह इन सब बातों को भूल कर फिर से हंसने मुस्कुराने लगता है और अपने जीवन में अन्य संघर्षों की ओर बढ़ चलता है।

अर्थात भूलना कोई अभिशाप नहीं है और हमें उचित बातों को ध्यान करके याद रखने की कोशिश करनी चाहिए और यह अभ्यास के माध्यम से संभव है।

प्रिय पाठक, मैं आपसे आशा करता हूं कि उपर्युक्त जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी और ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए gyanwing वेबसाइट पर विजिट करते रहें। धन्यवाद!

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